जब उनके आँगन में मेरी हँसी खिलती थी ...
वो हमेशा कहा करते थे
तुम्हारी हँसी जन्नत है
तुम्हारी हँसी मेरी धड़कन है
वो हमेशा कहा करते थे ...
जी करता है तुम्हारी हँसी चूम लूँ
और सजा कर रख लूँ
अपनी तनहाइयों में ,
वो उस समय बहुत कहा करते थे
तुम्हारी हँसी से
बहुत सारा उजाला आ गया है
उनके घर में ,
उनकी जिंदगी में ,
वो हमेशा कहा करते थे ...
हाँ! वो उसे बांहों में लेकर कहते थे
फ़िर...फ़िर...
ऐसा क्यों हुआ
की अचानक उन्होंने ही
बुझा दी मेरी हँसी
एक झटके में ...
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