धड़कती घड़ी ...
एक सुकून
ताजी सिहरन , धड़कती घड़ी
आलोड़ित कर देने वाला
वह कोमल ...
...अब छु ...आ ...
...अब छुआ ;
शीत की रात
कुंमकुंम से सजी
बिंदिया के बीच
छलक गई बूंद
घास पर पड़ा ओस कन...
...अब ढ ...र ...का ...
अब ढरका ;
चाँद की शीतल किरन
झांक रही
बदल की चुनरी से
गरम सांसें
ठिठकती हुई , करीब हो चली
और
पीपल का मनोरम पत्ता
अब हि...ला ...
अब हिला !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment